30 january is celebrated as: महात्मा गांधी से जुड़ी वह महत्वपूर्ण बाते जिन्हें सबको जाननी चाहिए

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30 january is celebrated as: महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात राज्य के पोरबंदर नामक स्थान में हुआ था। महात्मा गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक है। गांधीजी हमेशा अहिंसा के मार्ग पर चलते थे और इसी के तहत अपने हर एक आंदोलन को पूरा किए थे। महात्मा गांधी जी को महात्मा की उपाधि भारत के महान लेखक एवं गीतकार रविंद्र नाथ ठाकुर जी ने 2 अप्रैल 1919 को अपने एक लेख में गांधी जी को महात्मा की उपाधि दिए थे। इस आर्टिकल में हम महात्मा गांधी से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण बातों को बताने वाले है।

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महात्मा गांधी शुरुआती दौर में जब दक्षिण अफ्रीका गए थे, तो वहा उन्हें सबसे ज्यादा भारतीयों के प्रति हो रहे अत्याचार एवं भेदभाव का सामना काफी अधिक करना पड़ा था। शुरुआती दौर में उनके पास रेलगाड़ी के प्रथम श्रेणी कोच का टिकट होने के बावजूद भी इन्हें प्रथम श्रेणी कोच में बैठने नहीं दिया जाता था उन्हें तीसरी श्रेणी जहां काले लोग बैठते थे वहीं बैठने की अनुमति दी गई थी। उसी समय उन्होंने यह संकल्प लिए की अंग्रेजों को देश से भागना है।

सन 1916 में कांग्रेस का महा अधिवेशन लखनऊ में आयोजित किया गया था, इसी अधिवेशन में चंपारण का एक किसान राजकुमार शुक्ला भी शामिल हुए थे। वहां उन्होंने गांधी जी से मुलाकात कर, राजकुमार शुक्ला जी के पैतृक आवास चंपारण में अंग्रेजों के प्रति हो रहे हैं नील की खेती के उत्पीड़न को गांधी जी को बताएं और उनसे आगरा किए की इस समस्या को जल्द से जल्द निपटाए। चंपारण किसान आंदोलन में महात्मा गांधी अपने विचारधारा अहिंसा को आजमाते हुए इस आंदोलन को डॉ राजेंद्र प्रसाद, बृज किशोर प्रसाद, आचार्य कृपलानी जी के सहयोग से लड़े और जीत हासिल किए।

महात्मा गांधी का व्यक्तिगत संचालन असहयोग आंदोलन है। संपूर्ण देश में रॉलेट एक्ट कानून को पारित किया गया था जिसका उद्देश्य भारतीयों को बिना किसी जांच पड़ताल के सीधे करवावास में डालने की अनुमति दी गई थी। इसी कानून के विरोध में संपूर्ण देश में असहयोग आंदोलन गांधी जी के नेतृत्व में चलाया गया जिसका समर्थन संपूर्ण देश भर से महात्मा गांधी जी को मिल रही थी। फरवरी 1922 में गोरखपुर जिले के अंतर्गत एक पुलिस स्टेशन में आंदोलनकारियो के द्वारा पुलिस वालों के सहित पुलिस स्टेशन को जला दिया जाता है। इसके तुरंत बाद महात्मा गांधी जी ने इस आंदोलन को वापस ले लिए।

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी जी को नाथूराम गोडसे के द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी जाती है। इसी दिन से संपूर्ण देश में 30 जनवरी को शहीद दिवस के तौर पर मनाई जाती है।

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