Which flower is not offered to lord shiva: भगवान शिव को कौन सा फूल नहीं चढ़ाया जाता?

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Which flower is not offered to lord shiva
Which flower is not offered to lord shiva

Which flower is not offered to lord shiva: केतकी का फूल महादेव की पूजा में उपयोग करने का सिद्धांत एक प्राचीन कथा से उत्पन्न हुआ है। यह कथा भगवान शिव और माता पार्वती के बीच एक मनोभाव और आदर्शों को सार्थक बनाती है।

कथा के अनुसार, एक समय में माता पार्वती के मन में एक प्रश्न उत्पन्न हुआ कि कौन सा फूल है जो भगवान शिव को अधिक प्रिय है। माता पार्वती ने तब तय किया कि केवल वही फूल होगा जो सच्ची भक्ति और निष्कलंक प्रेम से चढ़ाया जाएगा।
माता पार्वती ने इस प्रतियोगिता को जीतने के लिए अपने पुत्र, कार्तिकेय को आग्रह किया। तब कार्तिकेय ने समुद्र के किनारे पर भयंकर साधना और तपस्या की और वहां से केतकी फूल को लेकर शिवलिंग पर चढ़ाया।

महादेव ने कार्तिकेय की उपासना और साधना को देखकर बड़ी खुशी हुई, लेकिन वे जानते थे कि केतकी फूल सच्ची श्रद्धा और प्रेम से नहीं, बल्कि एक प्रतियोगिता का हिस्सा के रूप में चढ़ाया गया था।
महादेव ने इस अवसर पर केतकी फूल को स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उन्हें यह ज्ञात था कि यह फूल भक्ति और प्रेम से नहीं, बल्कि एक प्रतियोगिता का हिस्सा के रूप में चढ़ाया गया था। उनकी आराधना में उन्हें ऐसे भक्त की तलाश थी जो स्वाभाविक और सादगी से उनकी भक्ति करता, जिसे चढ़ावा श्रद्धा और प्रेम से होता है, और जो दिखावे के लिए नहीं करता। इस तरीके से, उन्होंने यह बताया कि उन्हें आपसी प्रतियोगिता और अहंकार से ऊपर उठकर सच्ची भक्ति की पहचान करनी है

और वे व्यक्ति को चढ़ावा उपहार के रूप में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं मानते हैं। इसके परिणामस्वरूप, केतकी फूल को महादेव की पूजा में उपयोग करने का परंपरागत तरीका बना और उसे उनकी आराधना में समर्पित करने का प्रतिष्ठान नहीं मिला।
इस कथा से यह सिखने को मिलता है कि महादेव को सच्ची भक्ति और प्रेम से चढ़ाए जाने वाले चीजें पसंद हैं, और उनके सामने यह महत्वपूर्ण है कि चढ़ावा श्रद्धा और प्रेम से हो, और किसी प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं।

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